गुरुवार 11 जून 2026 - 15:11
हज़रत इमाम हुसैन अ.स.के हरम में एक सप्ताह तक चलने वाली अंतरराष्ट्रीय क़ुरआनी महफ़िल का शुभारंभ

हौज़ा / हज़रत इमाम हुसैन अ.स.के पवित्र हरम में एक सप्ताह तक चलने वाली अंतरराष्ट्रीय क़ुरआनी महफ़िल का शुभारंभ हो गया है, जिसमें विभिन्न देशों के प्रसिद्ध क़ारी, हाफ़िज़ ए क़ुरआन,उलेमा,विद्वान और क़ुरआनी अध्ययन के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हज़रत इमाम हुसैन अ.स. के पवित्र हरम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सप्ताह-ए-क़ुरआन की गतिविधियों का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। इस कार्यक्रम में पाँचवें अंतरराष्ट्रीय कर्बला अवार्ड सहित अनेक क़ुरआनी कार्यक्रम शामिल हैं। इसमें 30 विभिन्न देशों से आए क़ारी, उलेमा और धार्मिक हस्तियाँ भाग ले रहे हैं।

समारोह में हौज़ा-ए-इल्मिया के वरिष्ठ शिक्षक सैय्यद रियाज़ सईद अल-हकीम ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि क़ुरआन करीम इस्लाम का शाश्वत चमत्कार (मोजिज़ा) है और मुस्लिम उम्मत की पहचान तथा उसके मूल सिद्धांतों की रक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती नबियों (अ.स.) के चमत्कार एक विशेष काल और परिस्थितियों तक सीमित थे, जबकि क़ुरआन की हिदायत, उसकी शिक्षाएँ और उसका प्रभाव हर युग और हर पीढ़ी तक निरंतर पहुँचता रहता है। यह उसकी सार्वभौमिकता और समय तथा स्थान की सीमाओं से परे होने का प्रमाण है।

सैय्यद रियाज़ सईद अल-हकीम ने आगे कहा कि क़ुरआन का एक महत्वपूर्ण कार्य इस्लामी समाज की पहचान की रक्षा करना और उसे भटकाव तथा विभाजन से सुरक्षित रखना है, क्योंकि यही दिव्य ग्रंथ इस्लाम के मूल विश्वासों, सिद्धांतों और वास्तविक स्वरूप का संरक्षक है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) की बिअसत को चौदह सदियाँ बीत जाने के बावजूद क़ुरआन आज भी दुनिया भर के मुसलमानों की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान की सुरक्षा में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

हौज़ा के इस शिक्षक ने रसूलुल्लाह (स.अ.व.) और अइम्मा-ए-अहलेबैत (अ.स.) से वर्णित अनेक रिवायतों का हवाला देते हुए कहा कि क़ुरआन की सुंदर, सही और प्रभावशाली तिलावत पर विशेष बल दिया गया है।

उन्होंने कहा कि हुस्न-ए-क़िराअत क़ुरआनी शिक्षाओं को बेहतर ढंग से लोगों तक पहुँचाने और मोमिनों के दिलों में अल्लाह के संदेश के प्रति गहरा आध्यात्मिक एवं भावनात्मक संबंध उत्पन्न करने का माध्यम बनती है।

उन्होंने कहा कि क़ुरआनी शिक्षाओं से जुड़ाव और क़ुरआन की सही तिलावत मुस्लिम उम्मत की बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक मजबूती की गारंटी है, तथा इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजन क़ुरआनी संस्कृति के प्रसार में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाते हैं।

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